इरोड वेंकट रामासामी पेरियार ✓ सूरज सर ✓ इंजीनियर सूरज मोटन ✓ भारत के क्रांतिकारी
इरोड वेंकट रामासामी पेरियार (17 सितंबर 1879 – 24 दिसंबर 1973) एक भारतीय समाज सुधारक, राजनीतिक नेता और नास्तिक विचारक थे। उन्हें आमतौर पर पेरियार के नाम से जाना जाता है। वे तमिलनाडु में आत्मसम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement) के संस्थापक थे और उन्होंने जातिवाद, ब्राह्मणवाद, पितृसत्ता और धार्मिक अंधविश्वासों के खिलाफ संघर्ष किया।
पेरियार का जीवन परिचय
जन्म: 17 सितंबर 1879, इरोड, मद्रास प्रेसिडेंसी (अब तमिलनाडु)
मृत्यु: 24 दिसंबर 1973, वेल्लोर, तमिलनाडु
पिता: वेंकट नायकर (एक धनी व्यापारी)
माता: चिन्नाथई
पत्नी: नागम्मई (प्रथम पत्नी), मणियम्मई (द्वितीय पत्नी)
पेरियार का योगदान
1. आत्मसम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement)
1925 में, पेरियार ने आत्मसम्मान आंदोलन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य जाति-व्यवस्था, अंधविश्वास, धार्मिक रूढ़िवाद और महिलाओं के प्रति भेदभाव को खत्म करना था। इस आंदोलन ने तमिल समाज में गहरी जागरूकता फैलाई और दलितों तथा पिछड़े वर्गों को आत्म-सम्मान और अधिकारों के प्रति प्रेरित किया।
2. ब्राह्मणवाद और धार्मिक अंधविश्वासों का विरोध
पेरियार हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था के प्रबल विरोधी थे।
उन्होंने ब्राह्मणवाद और हिंदू धर्मग्रंथों, विशेष रूप से मनुस्मृति और रामायण की आलोचना की।
वे मूर्तिपूजा और अंधविश्वास के खिलाफ थे और तर्कवाद (rationalism) को बढ़ावा देते थे।
3. महिलाओं के अधिकारों की वकालत
उन्होंने विधवा पुनर्विवाह, महिला शिक्षा और महिलाओं के संपत्ति अधिकारों का समर्थन किया।
उनका मानना था कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर स्वतंत्रता और अवसर मिलने चाहिए।
4. द्रविड़ आंदोलन और राजनीति
पेरियार ने तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन को मजबूत किया, जो उत्तरी भारत के आर्यों के वर्चस्व के खिलाफ था।
1944 में, उन्होंने "जस्टिस पार्टी" का नाम बदलकर द्रविड़ कड़गम (Dravidar Kazhagam - DK) कर दिया।
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भी आलोचक थे क्योंकि उनका मानना था कि यह पार्टी ब्राह्मणवादी मूल्यों को बनाए रखती है।
5. हिंदी विरोध आंदोलन
1937 में, जब मद्रास प्रेसीडेंसी में कांग्रेस सरकार ने स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने की कोशिश की, तो पेरियार ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि हिंदी भाषा को थोपना दक्षिण भारतीय भाषाओं और संस्कृति के लिए खतरा है।
पेरियार की विरासत
उनके विचारों ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) जैसी तमिलनाडु की प्रमुख पार्टियों को प्रभावित किया।
आज भी तमिलनाडु में उन्हें "पेरियार अन्ना" (बड़े भाई) के रूप में सम्मान दिया जाता है।
कई स्थानों पर उनकी मूर्तियाँ स्थापित हैं और उनकी जयंती मनाई जाती है।
निष्कर्ष
पेरियार एक क्रांतिकारी समाज सुधारक थे जिन्होंने सामाजिक असमानता, जातिवाद और पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनका योगदान भारतीय समाज, विशेष रूप से तमिलनाडु, में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी विचारधारा आज भी तमिलनाडु की राजनीति और सामाजिक आंदोलनों को प्रभावित कर रही है।
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