महर्षि वाल्मीकि जी का संक्षेप परिचय ✓ सूरज सर ✓ इंजीनियर सूरज मोटन ✓2025


 महर्षि वाल्मीकि के गुरु के बारे में प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कोई विशेष उल्लेख नहीं मिलता है, लेकिन कुछ मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने नारद मुनि से ज्ञान प्राप्त किया था।


रामायण के अनुसार, वाल्मीकि पहले एक डाकू थे, लेकिन नारद मुनि के उपदेश से उनका हृदय परिवर्तन हुआ और वे एक महान ऋषि बन गए। नारद मुनि ने ही उन्हें भगवान राम के गुणगान करने की प्रेरणा दी थी। इस प्रकार, यदि आप "शीश" का अर्थ गुरु के रूप में पूछ रहे हैं, तो वे नारद मुनि थे।

महर्षि वाल्मीकि के "शीश" (शिष्य) के रूप में यदि देखा जाए, तो सबसे प्रमुख उनके आश्रम में पले-बढ़े लव और कुश थे।

रामायण के अनुसार, जब माता सीता वन में वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में रहने लगीं, तब वहीं पर उन्होंने लव और कुश को जन्म दिया। महर्षि वाल्मीकि ने ही उन्हें शिक्षा, युद्ध-कौशल, वेदों और शास्त्रों का ज्ञान दिया था। उन्होंने ही उन्हें रामायण का पाठ कराया और भगवान राम के गुणों से परिचित कराया।

इसलिए, महर्षि वाल्मीकि के सबसे प्रमुख शिष्य लव और कुश ही माने जाते हैं।


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